नया आगाज!

जिंदगी को एक नया रूप दिया है…
सोच को एक सही स्वरूप दिया है…
खुद के लिए जीकर क्या करूँगी?
हर पल दूसरों को समर्पित किया है…
नई दिशा नई उम्मीदें लिये…
उन चेहरों पर सच्ची खुशी लाने का खुद से वादा किया है…
जिंदगी को एक नया रूप दिया है…
कोई साथ दे या न दे…
पीछे न हटने का एक प्रण लिया है…
दूसरों से कभी कुछ नहीं चाहा…
क्योंकि खुद में ही सभी शक्तियों को शुमार किया है…
जिंदगी को एक नया रूप दिया है…
मिलते नहीं आसानी से यहाँ रब के सच्चे बंदे …
हर कोई भाग रहा है अनचाहे से रास्ते के पीछे…
प्रेरणा मेरी सोच के तो कई लोग हैं…
पर ये भी जानती हूँ कि डगर कठिनाइयों से सराबोर है…
हार मानना इस मन ने सीखा नहीं…
जिद्दी दिल हे बिना जिये उस पल को चैन इसे मिलता नहीं…
लिखना भी एक तरीका है उन पलों को जीने का…
बस उन खुशियों को पा जाऊँ यही मकसद है जिदगी का…

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